प्राणशक्ति का होता है अपार अभिर्वधन
गुरु मार्गदर्शन
में की गयी गायत्री साधना से साधक के पाप कटते हैं, कुसंस्कार जलते और जीवन कष्ट कठिनाइयों से मुक्त होकर
सौभाग्य से भरता है। जो साधक माँ गायत्री और माँ गंगा की अविरलता का योग बनाकर जप
साधना करते हैं, उनमें प्राणशक्ति
का अपार अभिर्वधन होता है। आइये! गंगा दशहरा पर शक्ति स्वरूप पवित्रता की पर्याय माँ
गंगा एवं विश्वमाता गायत्री की चेतना को आत्मसात करें, समुचित दान, व्रत, सेवा, सहयोग, सदभाव का संकल्प लें,
जीवन व परिवार को सुख, शांति, सौभाग्य से भर
लें।
माँ गंगा और
वेदमाता गायत्री का लोक कल्याण के लिए धरा पर अवतरण
स्वर्गीय
परिस्थितियां जब धरा पर बनने लगती हैं, तो जन जीवन में उत्सव आता है, चहुंदिशि
सुख-सौभाग्य की वर्षा होती है। गंगा दशहरा एवं गायत्री जयंती का दिन स्वर्ग में
निवास करने वाली माँ गंगा और वेदमाता गायत्री का लोक कल्याण के लिए धरा पर अवतरित
होने का दिन है। इसलिए प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी को गंगा दशहरा और
गायत्री जयंती मनायी जाती है। जीवन दायिनी माँ गंगा एवं ज्ञान की गंगा माता
गायत्री दोनों के धरा पर प्राकट्य दिवस के कारण इसे क्रांतिकारी दिवस के रूप में
मान्यता मिली। पौराणिक वर्णन है कि अपने शापित पूर्वजों की आत्मा के कल्याण हेतु
राजा भागीरथ ने इस धरा पर माँ गंगा को अवतरित करने के लिए कठोर तपस्या किया,
पृथ्वी पर गंगा का अवतरण हुआ।
स्वर्ग से माँ
गंगा के आगमन का अर्थ
स्वर्ग से माँ गंगा के आगमन का अर्थ है धरती को
स्वर्गीय परिस्थितियों से हरा-भरा करना। इस प्रकार प्रेम, सेवा, सदभाव, पवित्रता भरे जीवन की स्थापना का दिवस भी है यह
दिवस। जहां इस दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने से महायज्ञों के समान पुण्य
की प्राप्त होने की मान्यता है, वहीं इस अवधि में
गायत्री मंत्र का जप, साधना एवं
चाण्द्रायण तप का विधान भी शास्त्रें में वर्णित है। माँ गंगा के साथ ऋषियों
द्वारा स्थापित सदज्ञान परम्परा के प्रति समर्पण का संकल्प भी इसी दिन साधक लेते
हैं। इस निमित्त देश, धर्म, संस्कृति, साधु, संत, परोपकारी जन, गरीब व जरूरत मंद की सेवा हेतु यथाशत्तिफ़ दान देने से
पूर्वजों की प्रसन्नता व ईश्वर की कृपा मिलने की मान्यता है। स्कन्दपुराण की
मान्यता है कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी को माँ गंगा का धरती पर अवतरण हुआ था,
इसलिए इस दिन श्रद्धालुओं द्वारा स्नान,
दान-पुण्य से मुक्ति व मोक्ष की प्राप्ति होती
है। इस वर्ष 09 जून 2022,
गुरुवार को गंगा दशहरा एवं गायत्री जयंती मनाई
जा रही है।
पवित्रता,
प्रकाश, तेज और शक्ति रूप है गंगा-गायत्री
यद्यपि ज्ञान की गंगा गायत्री व माँ गंगा जी
दोनों ही पवित्रता, प्रकाश, तेज और शक्ति रूप है और तीनों काल में इनकी
गतिशीलता है। मंत्रें में गायत्री मंत्र सर्वाधिक सशक्त है, जिससे आध्यात्मिक एवं भौतिक दोनों प्रकार के लाभ मिलने लगते
हैं। वास्तव में आत्म शक्ति प्राप्त करने वाली दिव्य दृष्टि जिस शुद्ध बुद्धि से
प्राप्त होती है, उसकी प्रेरणा
गायत्री द्वारा ही मिलती है। गायत्री सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की धात्री है। गायत्री
ही विश्व माता है। ‘‘मनौ वै सविता। प्राण धियः। प्राण एव सविता, विद्युदेव सविता।’’ अर्थात गायत्री मंत्र जप
साधना से मानव के अतःकरण में सूर्य जैसी तेजस्विता विकसित होती है। ब्रह्मपुराण
में महर्षि व्यास जी कहते हैं कि ‘‘मातृ शक्ति से बड़ी दुनिया में कोई शक्ति नहीं
है। माँ ही सबको सम्हालती व सबको धारण करती, सबकी सहती और सबको धन-धान्य से भरती है। जिसके सम्हालने से
व्यक्ति सम्भल जाय, जिसके बसाने से
उसकी दुनिया बस जाय, वह मातृ शक्ति ही
है। गायत्री इसी लिए विश्वमाता है, इसकी साधना से
जीवन में सम्पूर्ण शक्तियां सहज जागृत होने लगती है।
दान, व्रत, सेवा, सहयोग, सदभाव का लें संकल्प
इस प्रकार माँ गायत्री व्यक्ति को चेतना स्तर
पर समृद्धि देती है, वहीं माँ गंगा
भौतिक शक्ति की दात्री हैं। इनकी कृपा से धरा हरा भरा बनती है और व्यक्ति के
अंतःकरण में पवित्रता का विकास होता है। माँ गंगा स्वयं में मंत्र है, गायत्री प्राणों को जगाती है, गंगा प्राणों को पवित्र करती हैं। सभी जानते
हैं कि विश्वव्यापी प्राणशक्ति जहां व जिस व्यक्ति में जितनी अधिक मात्र में
एकत्रित होती है, उसमें उतनी ही
सजीवता दिखने लगती है। इस प्रकार माँ गंगा जी के तट पर गायत्री मंत्र जप से
प्राणों का अद्भुत परिष्कार होता है, बुद्धि नीर-क्षीर विवेकी बनती है। साधक में दिव्य तेज भरता है, सफलता व सिद्धियों के द्वार खुलते हैं, स्वास्थ्य संवर्धन होता है। गुरु मार्गदर्शन
में
विधिविधान के साथ
किया गया 21 दिवसीय यह जप-अनुष्ठान
साधक को अनेक सुख-सौभाग्यों से भर देते हैं। माँ गंगातट व पवित्र नदी, झील, सरोवर पर नियमित ठीक विधि से, ठीक समय पर,
गुरु मार्गदर्शन में की गयी गायत्री साधना से
साधक के पाप कटते हैं, कुसंस्कार जलते
और जीवन कष्ट कठिनाइयों से मुक्त होकर सौभाग्य से भरता है। जो साधक गायत्री और माँ
गंगा की अविरलता का योग बनाकर जप साधना करते हैं, उनमें प्राणशक्ति का अपार अभिर्वधन होता है।
आइये! गंगा दशहरा
पर शक्ति स्वरूप पवित्रता की पर्याय माँ गंगा एवं विश्वमाता गायत्री की चेतना को
आत्मसात करें, समुचित दान,
व्रत, सेवा, सहयोग, सदभाव का संकल्प लें, जीवन व परिवार को सुख, शांति, सौभाग्य से भर
लें।

No comments:
Post a Comment