दीपावली पर डायरी
बनाये, पूंजी में हो जायेगी वृद्धि !
माँ लक्ष्मी की प्रतिष्ठा का पर्व है दीपावली
दीपावली जीवन एवं
परिवार में प्रकाश के सहारे माँ लक्ष्मी की प्रतिष्ठा का पर्व है। इस दिन लोग
ज्योति के समक्ष विशेष मंत्र साधना करते हैं। जिससे आत्म ज्योति जागृत हो और वह
जीवन दीप बनकर दूसरे जरूरतमंदों को
प्रकाशित कर सके, यही दीपावली का
मुख्य संदेश है। इस दिन लोग पर्व पूजन के समय मिष्ठान, मंत्र साधना, दीप जागरण आदि करने के साथ साथ अपने आय-व्यय पुस्तिका का पूजन करते हैं और
अगामी वर्ष के लिए आर्थिक योजना बनाते हैं। जिससे पर्व पर माँ लक्ष्मी के समुचित
उपार्जन तथा उपयोग का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
दीपावली समायाति नीत्वा संदेशमुत्तमम्।
अर्जुनस्योपयोगस्य चोचितस्य श्रियः खलु।।
पौराणिक मान्यता अनुसार इस दिन श्री
गणेश-लक्ष्मी के पूजन की परम्परा है। संदेश है व्यक्ति सम्पत्ति के साथ-साथ विवेक
का भी वाहक बने। पर विवेक को जगाने के लिए जिस निवेश की बहुत बड़ी आवश्यकता होती है,
वह उसी को नजरंदाज कर देता है, इन्हें व्यक्तित्व गढ़ने वाले मूल्यवान सूत्र
कहते हैं। डायरी लेखन हमें इन्हीं सूत्रों से जोड़ती है।
अज्ञात व एकांत
गुरु की तरह है डायरी
देश के
महापुरुषों ने डायरी को अज्ञात व एकांत गुरु की मान्यता दी है। इस संदर्भ में
दीपावली पर्व पर विचार करें तो इस दिन सभी दीपक भी जला लेते हैं, व्यावसायिक बही खाते का पूजन भी कर लेते हैं,
पर जिससे हमारे मन, बुद्धि, विवेक में जीवन
मूल्यों का प्रवेश हो सके, उस बही खाते को
नजरंदाज कर देते हैं।
जीवन समीक्षा का वहिखता
है
“दीपावली पर साधकों को अपने व्यक्तित्व निर्माण की भी
समीक्षा करनी चाहिए, इसके लिए जीवन
रूपी बहीखाते में वर्षभर के लिए डायरी लेखन को प्रवेश देना चाहिए। हम चाहते हैं कि
प्रत्येक जन जीवन से अज्ञान, अन्याय, अधर्म के अंधेरे को दूर करने के लिए डायरी लेखन प्रारम्भ
करे, अपने जीवन को गढ़े और
अंतःकरण के दीप को प्रज्ज्वलित करने में समर्थ बने। इससे जीवन में
सेवा-पवित्रता-परोपकार जन्म लेगा और सारी धरती से दुख-संताप, अन्याय, अभाव, अज्ञान का अंधेरा
मिटेगा, स्वर्णिम जीवन की आभा से
चहुँदिश जगमग हो उठेगा। यही होगा असली दीपावली पर्वोत्सव।”
हो जाता है मूल्यवान
संतों-
गुरुओं-महापुरुषों के जीवन व्यवहार में प्राप्त होने वाले सारगर्भित सूत्रों को
अपने व्यक्तित्व निर्माण हेतु नियोजित करने, उन्हें सतत आत्मसात करने के योग्य बनाने का आधार है डायरी
लेखन। वास्तव में हर जागरूक व्यक्ति की अपनी एक डायरी होनी चाहिए, उसमें वह जीवन निर्माण से जुडे़ सम्पूर्ण
बिन्दु लिखकर रखे और समय- समय पर उसका चिंतन-मनन कर सके, साथ ही नित्य जीवन में होने वाली त्रुटियों की समीक्षा कर
सकें, तो जीवन कुछ ही समय में
मूल्यवान बनाया जा सकता है।
डायरी हर किसी के
लिए आत्मनिरीक्षण करने की अनमोल निधि होती है, जिसमें कुछ नियमित स्तंभ, जिंदगी की कुछ अनोखी घटनाएं, रात्रि शयन व जागरण का खाका, निर्विघ्न निद्रा के सूत्र, सोने से पूर्व की प्रार्थना, रात्रि के तीसरे प्रहर सोकर उठने के लाभ, ध्यान-साधना के साधन, चौबीस घंटे की कार्ययोजना जैसे महत्वपूर्ण पक्ष
डायरी में समाहित किये जाते हैं।
परम पूज्य सुधांशु
जी महाराज कहते हैं
“अपनी डायरी में
अपने पूरे जीवन वृत्तान्त के शाश्वत मूल्यों को स्थान देकर उसपर चिंतन-मनन करने
वाला साधक जीवन में होने वाली न जाने कितनी भूलों, गलतियों से बचता और जीवन को शानदार रास्ते पर पहुंचा लेता
है। इस प्रकार वह एक दिन अन्य के लिए प्रेरक बन जाता है, इसलिए डायरी जीवन का महत्वपूर्ण प्रदर्शक भी कहलाती है।”
डायरी को अपना
मूक मार्गदर्शक मानने वाले साधक के जीवन में कितनी भी व्यस्तता होगी, लेकिन वह ध्यान-साधना के लिए कुछ समय जरूर
निकालेगा और इसमें वह अपना हित अनुभव करेगा।
स्वाध्याय से जोडती
है डायरी
डायरी स्वाध्याय
के सुख से भी जोड़ती है। स्वाध्याय से उसे पुरुषार्थ की, परिश्रम की, सद्गुणों की,
सहनशीलता की, वीरता की, प्रार्थना की,
उपासना की और जीवन को गरिमा मय बनाये रखने की
प्रेरणायें मिलती हैं। इसलिए साधक स्वाध्याय के लिए भी अपनी डायरी में एक कालम
अवश्य बनाकर रखे। सत्संग संसार की सबसे सुंदर वस्तु है। सत्संग में बिताया हुआ
प्रत्येक पल भगवान के चरणों में बीतता माना गया है। डायरी में सत्संग काल की सुखद
अनुभूतियों को भी स्थान देना चाहिए।
व्यक्तित्व में
मूल्यों का करें निवेश डायरी में
डायरी में इस बात
का भी जिक्र करें कि दीन-दुःखी, बीमार-रोगी,
असहाय-अनाथ, लाचार और मजबूर की हमने कब, कैसे और क्या सहायता की है? सेवा-सहायता के कार्य को आगे बढ़ाना परोकार के अन्तर्गत ही
आता है, सेवा कार्य जीवन को
महानता से जोड़ता है।
व्रत-उपवास करना
एक तप है, व्रतों से आत्मा शुद्ध
होती है, संकल्प शक्ति बढ़ती है।
भक्ति, श्रद्धा और एकाग्रता का
संचार होता है। इस नियम पालना को डायरी में स्थान दें। वाणी संयम को महत्व दें तथा
व्यंग्यात्मक शब्दों के प्रयोग से बचाव कराती है डायरी। सबके प्रति दया सहानुभूति
की कामना रखने का भाव अंदर से जगाने का प्रयास करें। प्राणायाम-योग से जुड़े सूत्रों
को भी डायरी का अंग बनायें। इसी प्रकार कुछ अवसर प्रायश्चित और पश्चाताप के भी
समाहित होने चाहिए।
तो आइये! जीवन निर्माण संबंधी ऐसे ही अनेक बिन्दुओं वाली डायरी बनायें, उनमें जीवन मूल्यों को स्थान दें, उन्हें आत्मसात करते हुए व्यक्तित्व में निवेश करें और दीपावली पर्व मनायें।

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