हृदय की भाषा को विश्व पटल पर भी लेकर आयें | विश्व हिंदी
दिवस 2021
निज
भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।। - भारतेन्दु
हरिश्चंद्र
10 जनवरी
का दिन सभी भारतीयों और हिन्दी प्रेमियों के लिए विशेष है
क्योंकि आज के दिन पृरी दुनिया में विश्व हिन्दी
दिवस मनाया जाता है। विश्व हिन्दी दिवस की शुरुआत 10 जनवरी 2006 में हुई थी। उसके
बाद हर साल 10 जनवरी
को विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है। विश्व हिन्दी दिवस मनाने की घोषण करने का
उद्देश्य संसार में हिन्दी
भाषा के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना था।
आज संसार में 6809 से अधिक भाषाएं और अनगिनत बोलियां हैं, हमारे देश में विभिन्न भाषाएँ बोली जाती हैं। जिसमें से एक भाषा हिन्दी भी है। हिन्दी संसार की दूसरी बड़ी
भाषा है जिसका उपयोग सर्वाधिक आबादी करती है। हमारे देश में हिन्दी अधिकतर लोगों द्वारा बोली जाती है। 14
सितम्बर 1949 को भारतीय संसद ने हिन्दी को देश की ‘राजभाषा’ का दर्जा दिया। हिन्दी को
देश की जननी कहा जाता है। देश के प्रत्येक कोने में हिन्दी भाषा का उपयोग किया
जाता है। सामान्य बोलचाल से लेकर बड़े-बड़े कामों में, कार्यक्रमों में, भाषणों में, समाचार पत्रों में,
सरकारी कामकाज में, शिक्षा में, मनोरंजन आदि क्षेत्रों
में हिन्दी भाषा का महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी भाषा ने ही इस देश को एकता के सूत्र में बाँधकर रखा है।
हिन्दी एक ऐसी भाषा है जिसका उपयोग देश का हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी धर्म,
समुदाय तथा जाति का हो, वह कहीं-न-कहीं हिन्दी का सम्मान है और वह इसे अपने देश की
आन, बान एवं शान समझता है।
देश की एकता में हिन्दी
का योगदान
किसी भी समाज में जीवन
यापन करने के लिए एक अच्छी सी बोली की आवश्यकता होती है। यह बोली किसी भी व्यक्ति
के जीवन में महत्वपूर्ण होती है। अर्थात् मनुष्य को अपने निर्वाह के लिए भाषा का
ज्ञान होना आवश्यक होता है। भाषा के द्वारा ही समाज में एक-दूसरे से विचारों का
आदान-प्रदान करते हैं, जिससे लोगों के बीच मधुर
सम्बन्ध स्थापित होते हैं और एक सुन्दर समाज का निर्माण होता है। हिन्दी भाषा के
द्वारा आपस में सम्बन्ध होने से हम समाज को एकता के सूत्र में बाँध सकते हैं। एक
समाज से पूरा देश इस भाषा के माध्यम से एक होता है। उसके प्रति अपनी जागरूकता को
प्रदर्शित करता है। इससे हमारा देश वास्तव में अनेकता में एकता का प्रतीक बनता है।
स्कूलों, विद्यालयों तथा सभी संस्थानों में हिन्दी का
प्रयोग
भारत के सभी शिक्षण
संस्थानों में हिन्दी का प्रयोग किया जाता है। शिक्षा के सभी पाठ्यक्रमों में
हिन्दी को सर्वप्रथम वरीयता दी जाती है। सभी पाठ्यक्रमों में हिन्दी अनिवार्य रूप
से आवश्यक होती है। इसके अलावा सभी अन्य संस्थानों, कार्यालयों, सरकारी आफिसों आदि सभी
जगहों पर हिन्दी भाषा का प्रयोग होता है, चाहे वह किसी भी वर्ग का व्यक्ति हो, वह हिन्दी भाषा का ज्ञान अवश्य रखता है।
समाचार पत्रों तथा
पत्र-पत्रिकाओं में हिन्दी का योगदान
देश में प्रकाशित अखबारों
तथा सभी पत्रिकाओं आदि में भी हिन्दी का महत्वपूर्ण योगदान है। सभी प्रकार के
समाचार-पत्रों तथा समाचार सेवा जैसे न्यूज चैनल या मीडिया के प्रसार-प्रसार में
हिन्दी का बहुत बड़ा योगदान है, क्योंकि हमारे देश में
अधिकतर लोग हिन्दी का ज्ञान आवश्यक रूप से रखते हैं। उन्हें यदि कोई खबर का
प्रचार-प्रसार करना है तो उसका माध्यम हिन्दी ही है। विदेशी कम्पनियाँ भारत में
अपना सामान तभी बेच सकती हैं जब उनके विज्ञापन हिन्दी अथवा स्थानीय भाषा में हो
ताकि जन-मानस तक उसे आसानी से पहुँचाया जा सके। इससे हिन्दी भारत के अलावा विदेशों
में अपना सर्वोच्च स्थान बनाने में कामयाबी की तरफ बढ़ रही है।
फिल्मी उद्योग के क्षेत्र
में हिन्दी का वर्चस्व
फिल्मों में हिन्दी का
अपना वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। सभी गानों में तथा मनोरंजन के सभी साधनों में हिन्दी
भाषा का प्रयोग किया जाता है। हिन्दी ही एक ऐसा भाषा है जो देश में सभी के दिलों
पर राज करती है। जो फिल्मों के शौकीन हैं उनके लिए हिन्दी में फिल्में उनका
मनोरंजन का साधन हैं, जो गाने व सुनने के शौकीन
हैं, उनके लिए हिन्दी में गाने
उनका साधन हैं। भक्तिगीत से लेकर देशभक्ति गीत हर गानों, हर फिल्मों में हिन्दी का प्रयोग किया जाता है जिससे लोगों
का मनोरंजन हो सके, इन सभी आवश्यकताओं या
मनोरंजन में रुचि रखने वालों को हिन्दी का ज्ञान बहुंत जरूरी है। हिन्दी मनोरंजन
का बड़ा अच्छा साधन है।
देश के विकास के लिए एक
भाषा का होना अति आवश्यक है
किसी भी देश के विकास के
लिए एक भाषा का होना अति आवश्यक है। हमारे देश के विकास में हिन्दी का ही
महत्वपूर्ण योगदान है। हिन्दी से समाज और देश का निर्माण हुआ है, हिन्दी हमारे देश की राजभाषा है और हमें हिन्दी
में बात करने में और काम करने में गर्व होना चाहिए। देश के हर कोने में हिन्दी की
अलख जगाना चाहिए। हिन्दी राष्ट्र का गौरव है, हमें इसे बरकरार रखने में कदम से कदम और हाथ मिलाकर चलना
है। हिन्दी का प्रयोग हर क्षेत्र में हो, ऐसी हम लोगों की हर सम्भव कोशिश होनी चाहिए।
हिन्दी देश की आन है,
बान है और शान है और इस आन, बान एवं शान को हमें कायम रखने की भरपूर चेष्टा
करनी चाहिए। आइए! इस दिशा में हम सब मिलकर आगे बढ़ें।
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