कभी-कभी ऐसा समय
आता है जिसे जीवन भर भुला पाना सम्भव नहीं होता। यहाँ तक कि उस विषेश समय को
पीढ़ियाँ याद रखती हैं और उसकी चर्चा गाहे-बगाहे सदियों तक की जाती है। इक्कीसवीं
सदी के बीसवें बरस के शरूआती दौर में वैश्विक स्तर पर आए कोरोना संक्रमण के इस काल
के बारे में भी कुछ ऐसा ही कहा जा सकता है। कोरोना वायरस और लॉकडाउन इन दोनों शब्दों
को विस्मृत कर पाना इस पूरी शताब्दी में शायद ही दुनिया के किसी भी व्यक्ति के लिए
मुमकिन हो।
हाउस अरेस्ट जैसी
इस अवधि की अनेक हानियाँ गिनी और गिनायी जा सकती हैं। लेकिन यह भी सच है कि
लॉकडाउन के इस पीरिएड के अनेक लाभों की चर्चा न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया
में होने लगी है। अलग-अलग व्यक्तियों के लाभ और हानियाँ अलग होंगी जिनकी चर्चा
यहाँ करने की जरूरत महसूस नहीं की जा रही, इस अवसर पर यही कहा जा सकता है कि
लॉकडाउन के इस समय ने प्रकृति और मनुश्य सभी को एक मौका दिया है नया बनने का, खुद को खुद के लिए समय देने का, स्वयं को और अधिक बेहतर बनाने का, यह चिन्तन करने का कि मैं कौन हूँ? कहाँ से आया हूँ? किसने हमें भेजा
है? हमारा जीवन लक्ष्य क्या है? मैं कहाँ जा रहा हूँ? कहते हैं कि कोई
आदमी जब ऐसे प्रश्न अपने आपसे करने लग जाता है तब अध्यात्म की उच्च कक्षा में उसका
प्रवेश हो जाता है। गीता की इन ऑनलाईन कक्षाओं ने विश्व जागृति मिशन परिवार के
अलावा देश-विदेश के अनेकानेक अध्यात्मप्रेमियों को अद्भुत सन्देश देने में सफलता
पायी।
विश्व जागृति मिशन
ने कोरोना काल को बिल्कुल अलहदा तरीके से जिया। इस विशाल आध्यात्मिक परिवार के कल्पनापुरुष पूज्य सद्गुरु
श्री सुधांशु जी महाराज ने गुरुधाम आनन्दधाम में ही बैठे-बैठे ऑनलाईन जो प्रसाद
वितरित किया, उसे शब्दों में बयां
नहीं किया जा सकता। गुरुदेव की इस कृपा के प्रति आभार व्यक्त करते हुए हम कहना
चाहेंगे कि इस अवधि में जहाँ एक ओर शरीर, मन और आत्मा के
रहस्यों को समझने का अवसर मिला, वहीं मन को शांत
करने की विधा साधक मनों ने सीखी। गुरुवर के गीता उपदेश के माध्यम से मन की स्थिरता
की, प्रभु श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए उपदेश
के अनुसार स्थितप्रज्ञ बनने की तथा अपने भीतर की वास्तविक ख़ुशी को तलाशने की
तकनीकें शिष्यों -साधकों ने सहज सीखीं और गुरुदेव परम पूज्य सुधांशु जी महाराज से
उपकृत हुए।
आप सभी अवगत हैं
कि गुरुदेव परम पूज्य सुधांशु जी महाराज द्वारा आनन्दधाम नयी दिल्ली से बीते 48 दिनों से गीता पर विशेष सन्देश ऑनलाईन दिया जा
रहा है, जिसे ढाई करोड़ से ज्यादा श्रोता प्रतिदिन सुन
रहे हैं। आनन्दपथ श्रृंखला के अन्तर्गत गीतामृत के जरिए सद्गुरुदेव द्वारा सुधी
श्रोताओं की विचार शुद्धी के अनेक मन्त्र
प्रदान किए गए। अब एक नयी कार्यक्रम श्रृंखला शुरू होने जा रही है जिसके तहत आगामी
25 मई से व्यक्ति के मन और आत्मा
को सबल बनाने तथा उनकी शुद्धी के लिए गुरुदेव का सशक्त मार्गदर्शन सभी को मिल
सकेगा। ऑनलाईन मेडिटेशन का यह कार्यक्रम प्रतिदिन प्रातः 7 बजे से 8 बजे तक चलेगा, जो पंजीकृत साधकों के लिए मोबाईल के माध्यम से उपलब्ध
होगा। सन्ध्याकाल आदरणीया डॉ0 अर्चिका दीदी
भावकमना साधकों का व्यावहारिक मार्ग दर्शन करेंगी।
हर साल मई/जून
महीने में हिमाचल के मनाली स्थित आनन्दम तीर्थ में हजारों शिष्य-साधक पूज्य
गुरुदेव व श्रद्धेया अर्चिका दीदी के साथ ध्यान की गहराईयों में उतरते थे। इस वर्ष
प्रकृति की व्यवस्था के चलते घर बैठे वही साधना लाभ आप स्वजनों के लिए उपलब्ध
होगा। इसमें तीन तरह की ध्यान साधनायें तो सिखायी ही जायेंगीए मन पर नियन्त्रण
कैसे पाया जाए? अच्छी नींद की प्राप्ति
के उपाय क्या हों? किस तरह आत्मतत्व को
जागृत किया जाए? जैसे विषयों पर भी
गुरुनिर्देश प्राप्त होंगे। पंचकोश की शुद्धि तथा व्यक्ति के मस्तिश्क तक सही
विचारों के प्रवाह के उपयोगी सूत्र भी गुरुदेव द्वारा दिए जायेंगे।
मनाली में करायी
जाने वाली चान्द्रायण तप साधना भी ऑनलाईन प्रोग्राम का विशेष हिस्सा होगी।
कार्यक्रम निम्नवत होगाः-
पहला पाँच दिवसीय
कार्यक्रम 25 मई से
दूसरा सात दिवसीय
कार्यक्रम 30 मई से
तीसरा पंद्रह दिवसीय
कार्यक्रम चान्द्रायण साधना का 25 मई से
हमारा आह्वान है
कि आप भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। अपने रजिस्ट्रेशन का आवेदन अधिक जानकारी के
लिए संपर्क करें 📳 : 8826891955, 9312284390, 7291986653, 9560792792

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